ईमानदारी की कमी !!
ईमानदारी की कमी !!
यूरोप ने अल्लाह के अस्तित्व को मानने से इनकार कर दिया !!
मटेरियल (पदार्थ) को हक माना !!
और
मटेरियल पर गौर-ओ-फिक्र किया !!
मटेरियल पर तदब्बुर किया !!
बदले में साइंस और टेक्नोलॉजी वजूद में आई !!
हम मुसलमानों को अल्लाह ने कुरान और सीरत दी !!
हमने बहुत गौर-ओ-फिक्र की !!
तदब्बुर किया !!
बदले में हमने ढूंढ निकाले—
अरब इम्पेरियलिज्म (साम्राज्यवाद)
शिया सुन्नी नफरत
तसव्वुफ, सूफीज्म, पीरी और फकीरी
फिक्ह परस्ती
फिरकापरस्ती !!
इसका मतलब हम कुरान और सीरत को लेकर उतने ईमानदार नहीं थे जितना ईमानदार यूरोप के लोग मटेरियल को लेकर थे !!?
अफसोस तो इस बात का है
कि आज भी संभलने को तैयार नहीं है मुसलमान !!
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