मुसलमानों का गोल शिफ्ट !!

मुसलमानों का गोल शिफ्ट !!
नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) और सहाबा की ज़िन्दगियों तक नमाज़, ज़कात, रोज़ा, हज और अमले सालेह (तज़किया-ए-नफ्स) के बाद अल्टीमेट गोल होता था ज़मीन पर सोशल और इकोनॉमिक जस्टिस को एस्टेब्लिश करना !!
उमय्याद के बाद हम नकली मुसलमानों का ज़माना शुरू हुआ !!
फ़रायज़ और अमले सालेह (तज़किया-ए-नफ्स) ही अल्टीमेट गोल बन गया !!
कुछ लोगों का ज़मीर उनको कोसने लगा !!
कहने लगा ये अल्टीमेट गोल ऑफ इस्लाम नहीं है !!?
तब जाकर हम नकली मुसलमानों के असली इल्मी डरपोकों की नज़र क़ुरआन के सूरह कहफ़ पर गई !!
वहां मूसा (अ.स.) और ख़िज़्र साहब के बीच का एक वाक़िया नक़ल किया है अल्लाह ने !!
यहां एक फैब्रिकेटेड गोल मिल गया !!
अब शुरू हुआ सूफ़िज़्म, पीरी, फ़कीरी, खानकाही सिस्टम !!
लोग मुराक़बे और अल्लाहू-अल्लाहू के ज़रिये अल्लाह से क़रीब होने लगे ख़िज़्र साहब की तरह !!
फिर यूनानी मंतक़ और फ़लसफ़े का हमला हुआ !!
उसने आग में घी का काम किया !!
अब लोग अल्लाह के इतने क़रीब होने लगे कि शरीयत की पाबंदियां भी उन पर से उठने लगीं !!
हज़ार सालों तक यही हम मुसलमानों का अल्टीमेट गोल रहा !!
और दुनिया पर ला-मज़हब वेस्ट का क़ब्ज़ा हो गया !!
वेस्टर्न कॉलोनियलिज़्म, कैपिटलिज़्म और ज़ायोनिज़्म लॉन्च हो गए !!
हम आज तक उन्हीं चुतियापों, फ़िक़ह परस्ती और फ़िरक़ापरस्ती में उलझे पड़े हैं !!
एहसास तक नहीं कि इस्लाम को कितना छोटा कर दिया है हमने !!


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